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जागो भारत जागो ! चीनी ड्रेगन के इरादे अच्छे नहिं है।

भारत के अरुणाचल प्रदेश में चीनी लश्कर कि अनुचित घूसपैठ के समाचार आये दिन अखबारो में चमकते है, ओर हमेंशा की तराह थोडे दिन उसपे गुस्साई चर्चा होती है, और थोडे दिनो में हम महान भारतवासी ये सब भूल जाते है।
मेकमोहन सीमा कि हमेंशा से उपेक्षा करने वाले चीन कि भारतीय सीमा में घूसपैठ कइ सालो से हो रही है इसलिये, चीन की घूसपैठ को समाचार का लेबल लगाना गलत है। २००७ की साल में चीनी लश्कर कुल ७७८ बार और साल २००८ में कुल

मिलाके २२८५ बार सीमा का उलंगन कर चुका है। भारत के सीमा विस्तार में चीन खुलेआम अपने लश्करी मथक खडे करे, रेडार मथक लगये, सीमातक पक्की और चौडी सडके, रेलमार्ग बनाये, शस्त्रो कि जमावट करे, और उसके सैनिक पेट्रोलिंग के नाम पर सीमा पार करके भारत में घूस आये उसमें असाधारण कहे जानेवाली बात क्या है !? कम से कम भारत की केन्द्र सरकार ऐसा सोच रही हो ऐसा लगता है, इसलिये तो सीमा पे सब सलामत समझ के सालो से गाढ निन्द्रा में सो रही है।
आर्थिक मर्चे पर आज तेजी से आगे बढने वाला चीन भले ही र्पूंजीवादी हो, किन्तुं इस देश का इतिहास खंगाले तो पता चलेगा कि उसके शासको कि नीति हमेशा विस्तारवादी रही है। ई.सन. १६६४ में चिंग वंश के राजा चीयेन लुंगे भारत के नेफ़ा (आज का अरुणाचल प्रदेश) और लद्दाख पे आक्रमण करके उसे अपने साम्राज्य से जोड दिया । सालो बाद ब्रिटन, जापान, अमेरिका, और रशिया के साथ हुये अलग अलग युद्धो में चीन को अपना कुछ प्रदेश गंवाना पडा, जिसमें नेफ़ा और लद्दाख का भी समावेश होता था। ये दोनो प्रदेशो को फ़िरसे पाने के लिये चीन के शासको ने प्रयास शुरु कर दिये। ई.सन.१९५० में तिब्ब्त पे आक्रमण करके उस देश को हमेशा के लिये चीन से जोड दिया। १२ साल बाद ई.स.१९६२ में भारत पे आक्रमण करके चीनी प्रधानमंत्री चाउ-एन-लाउ ने भारत का करीब ३८,००० चोरस किलोमीटर प्रदेश अवैध रुप से अपने कब्जे में कर लिया, और अब चीनी ड्रेगन की नजर हमारे अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख पे है। मौका पते ही वो ये दोनो प्रदेशो को निगल जाना चाहता है।


र्फ़ुंकार कर रहे चीनी ड्रेगन को काबु में करने के लिये भारत के लश्कर की तैयारी कैसी है? कुछ वास्तविकताये र्जांच ने जैसी है। आनेवाले दिनोमें अगर चीन ने हमारे अरुणाचल प्रदेश पे आक्रमण कर दिया तो अरुणाचल प्रदेश की सीमा तक आवश्यक लश्करी सामग्री ,सैन्य, शस्त्र-सामग्री आदी पहुचाने के लिये भारत के पास पक्की सडक का पक्का नेटवर्क नहिं है। सीमा तक पहुचने के लिये एक ही पक्की सडक है, जिस पर अगर चीन ने कब्जा करके अंकुश जमा दिया तो भारत की सप्लाय लाईन ही कट जायेगी । सडक का नेटवर्क रचने के लिये केन्द्र सरकार ने ७,००० करोड रुपये का प्रोजेक्ट तय किया है, किन्तुं प्रोजेक्ट पुरा हो तब कि बात तब पर चीन ने भारत से जुडी अपनी सीमा तक पक्की सडके और रेलवे लाईन का बाडा नेटवर्क कब का खडा कर दिया है। भारत के वायुसेना ने आसाम में तेजपुर एरवेज पे कुछ सुखोई-३० लडायक विमान को तैनात किये है। किन्तुं हमरी वायुसेना में इस वख्त लडायक विमानो कि बडी अछ्त है। नये १२६ लडायक विमान खरीद ने का प्लान संरक्षण मंत्रालय ने कब तय किया है, किन्तुं लडायक विमान पसंद करने का भी शुभ मुहूर्त अबतक नई निकला है। फ़िर विमान खरीद ना तो बहुत दूर कि बात है। चीनी वायुसेना की ताकत देखते हुये मुठ्ठीभर विमान की मदद से चीन के तेज आक्रमण को रोकना भारत के लिये बडा चुनौतीभरा हो ये स्वाभाविक है ।
भारत और चीन के बीच ब्रिटन के द्वारा तय हुई मेकमोहन सीमा रेखा चीन को मंजूर नहि है और इस बात का इशारा चीन के नेता लुच्चाई से करते आये है। अरुणाचल प्रदेश के तवांग से लेकर लोहित तक का प्रदेश और लद्दाख के पुरे प्रदेश को चीन हडपना चाहता है। (ताईवान को भी चीन हडपना चाहता है।) चीन कि घूसपैठ और उसकी विस्तारवादी नीति को देखते हुए हमारी सरकार को व्यूहात्मक और राजकीय कदम तत्काल लेने कि जरुरत है क्योकि ई.सन १९६२ में जो हुआ उसका पुनरावर्तन कम से कम भारत के पक्ष में न हो। पर अफ़सोस की बात है की चीनी ड्रेगन के आगमन की आहट सुनाई दे रही है ओर भारतीय शेर आराम फ़रमा रहा है।

Comments :

3 comments to “जागो भारत जागो ! चीनी ड्रेगन के इरादे अच्छे नहिं है।”
चंदन कुमार झा said...
on 

बहुत ही चिंतनिय विषय है यह । सुन्दर प्रस्तुति । होली की हर्दिक शुभकामनायें ।

psingh said...
on 

sundar post
abhar...........

DRS said...
on 

bahut hi badiya bat hain har koi apne se chhote deshoko nigalna chahata hai lekin chine apni takkar ki desh ko niglne ki socha hai

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